इंदौर के होलकर स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे के बाद जो नजारा देखने को मिला, उसने क्रिकेट फैंस और खिलाड़ियों दोनों को चौंका दिया। भारत की हार के बाद स्टेडियम में अचानक ‘गौतम गंभीर हाय हाय’ के नारे गूंजने लगे। इस दौरान टीम इंडिया के सीनियर बल्लेबाज विराट कोहली का रिएक्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह इन नारों को सुनकर साफ तौर पर हैरान नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ी मैदान पर खड़े हैं। इसी दौरान दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा गौतम गंभीर के खिलाफ नारेबाजी करने लगता है। दावा किया जा रहा है कि विराट कोहली, शुभमन गिल और अन्य खिलाड़ी यह सुनकर चौंक गए। खासतौर पर कोहली का भाव यह साफ दिखाता है कि वह इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं कर रहे थे।
सीरीज हार के साथ टूटा रिकॉर्ड
भारत के लिए यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी, बल्कि इसके साथ ही टीम ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से गंवा दी। यह न्यूजीलैंड की भारत में पहली वनडे सीरीज जीत है, जो भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। घरेलू मैदान पर इस तरह की हार ने फैंस को निराश किया और उसी का गुस्सा स्टेडियम में नारों के रूप में देखने को मिला।
भारत की इस हार के बाद सोशल मीडिया पर भी गौतम गंभीर को लेकर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई। कई फैंस ने उनकी कोचिंग पर सवाल उठाए और उन्हें हटाने की मांग तक कर डाली। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी सीरीज के शुरुआती मैचों के दौरान कुछ दर्शक गंभीर के खिलाफ नारे लगाते दिखे थे।
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कोहली की शानदार पारी, फिर भी हार
तीसरे वनडे में भारत को जीत के लिए 338 रनों का बड़ा लक्ष्य मिला था। लेकिन शुरुआत से ही टीम इंडिया की बल्लेबाजी दबाव में नजर आई। रोहित शर्मा सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि शुभमन गिल भी 23 रन ही जोड़ सके। शुरुआती झटकों के बाद विराट कोहली ने पारी को संभालने की कोशिश की।
विराट कोहली ने एक छोर संभालते हुए शानदार शतक लगाया और 124 रनों की पारी खेली। उन्होंने काफी देर तक टीम को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें कोई मजबूत साझेदारी नहीं मिल पाई। बाद में हर्षित राणा और नितीश रेड्डी ने अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन तब तक मैच भारत के हाथ से निकल चुका था। आखिरकार भारत को 41 रनों से हार का सामना करना पड़ा।
लगातार दबाव में टीम इंडिया
यह दूसरी बार है जब दो साल से भी कम समय में न्यूजीलैंड ने भारत को मात दी है। इससे पहले 2024 में भारत को घरेलू टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड के खिलाफ क्लीन स्वीप झेलना पड़ा था। अब 2026 में वनडे सीरीज हार ने उस दर्द को फिर से ताजा कर दिया है।
इतना ही नहीं, भारत इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी घरेलू टेस्ट सीरीज गंवा चुका है। इन नतीजों के बाद गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है और यही कारण है कि फैंस का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।
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गंभीर का कोच के तौर पर मिला-जुला रिकॉर्ड
गौतम गंभीर के कार्यकाल को देखें तो तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। टी20 फॉर्मेट में भारत ने उनके मार्गदर्शन में अच्छा प्रदर्शन किया है। 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप की जीत उनके खाते में बड़ी उपलब्धियों के रूप में दर्ज हैं। हालांकि टेस्ट और वनडे में टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है।
जुलाई 2024 से अब तक भारत ने गंभीर की कोचिंग में 20 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें से 12 में जीत मिली है। लेकिन श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज हार ने उनकी रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीसीसीआई का रुख साफ
हालांकि बढ़ती आलोचनाओं के बीच बीसीसीआई के सूत्रों का कहना है कि गौतम गंभीर की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित है। बोर्ड की तरफ से साफ संकेत मिले हैं कि वह 2027 तक अपने कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करेंगे। यानी फिलहाल फैंस की नाराजगी के बावजूद कोचिंग स्टाफ में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही।
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फीडबैक और विश्लेषण
इस पूरे मामले को देखें तो यह साफ है कि फैंस का गुस्सा सिर्फ एक मैच या सीरीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ सालों के नतीजों का असर है। घरेलू मैदान पर लगातार हार भारतीय क्रिकेट के लिए चिंता का विषय है। हालांकि यह भी सच है कि टी20 में मिली सफलताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मान लेना भी जल्दबाजी होगी कि सारी जिम्मेदारी सिर्फ कोच पर डाल दी जाए। खिलाड़ियों का फॉर्म, टीम चयन और मैच के अहम मौकों पर फैसले भी उतने ही अहम होते हैं। विराट कोहली की शतकीय पारी यह दिखाती है कि टीम में अब भी दम है, लेकिन सामूहिक प्रदर्शन की कमी साफ नजर आती है।
फैंस और विशेषज्ञों के लिए बेहतर होगा कि वे आने वाले मैचों में टीम की रणनीति, चयन और खिलाड़ियों की भूमिका पर ध्यान दें। आंकड़ों, मैच रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों के जरिए स्थिति को समझना ज्यादा सही तरीका होगा, बजाय इसके कि किसी एक व्यक्ति को पूरी तरह जिम्मेदार ठहरा दिया जाए।

