अमेरिकी ऑटो ब्रांड जीप ने भारत के लिए अपना नया रोडमैप पेश किया है। इस ‘स्ट्रैटेजिक प्लान जीप 2.0’ के तहत कंपनी 2027 में एक बिल्कुल नई SUV लॉन्च करेगी और भारत को अपने वैश्विक निर्यात का अहम केंद्र बनाने पर जोर देगी। साथ ही, ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर भी फोकस रहेगा।
यह नई SUV पिछले पांच साल में जीप की पहली बिल्कुल नई मॉडल होगी। 2027 तक, ब्रांड अपने मौजूदा वाहनों – जीप कंपास, मेरिडियन, रैंगलर और ग्रैंड चेरोकी – के विशेष संस्करण (स्पेशल एडिशन) लाता रहेगा ताकि बाजार में दिलचस्पी बनी रहे।
भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, निर्यात का केंद्र
जीप की यह नई रणनीति साफ करती है कि कंपनी के लिए भारत अब सिर्फ वाहन बेचने की जगह नहीं रह गया है। महाराष्ट्र के रंजनगांव स्थित जीप के प्लांट से पहले से ही जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों को वाहन एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं। अब इस निर्यात नेटवर्क को और बड़ा करते हुए अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। इससे भारत जीप के वैश्विक कारोबार में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगेगा।
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वाहनों में बढ़ेगी ‘मेड इन इंडिया’ की मात्रा
कीमतों को नियंत्रित रखने और भारतीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के लिए जीप वाहनों में स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) का स्तर बढ़ाना चाहती है। फिलहाल यह स्तर 65-70 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर लगभग 90 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे वाहनों की लागत पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और ग्राहकों को भी फायदा हो सकता है।
ग्राहक के अनुभव पर खास ध्यान
जीप की नई योजना में सिर्फ वाहन बेचना ही नहीं, बल्कि ग्राहक को पूरा अच्छा अनुभव देना भी शामिल है। इसके लिए कंपनी ‘कॉन्फिडेंस 7’ सर्विस इकोसिस्टम को मजबूत कर रही है। इसमें अश्योर्ड बायबैक प्रोग्राम (एक निश्चित समय बाद वाहन वापस खरीदने की गारंटी), प्री-मेंटेनेंस प्लान, एक्सटेंडेड वारंटी जैसे प्रोग्राम शामिल हैं। साथ ही, जीप क्लब, ऑफ-रोड ट्रेल और कैंप जीप जैसे इवेंट्स के जरिए ग्राहकों के बीच एक कम्युनिटी की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा।
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“भारत में सफलता के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जरूरी”
स्टेल्लांटिस इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक, शैलेश हजेला ने इस रणनीति के बारे में बताते हुए कहा, “जीप की 85 साल की विरासत ऑथेंटिसिटी और एडवेंचर पर बनी है। स्ट्रैटेजिक प्लान Jeep 2.0 यह रेखांकित करता है कि हम हर साल गहरे स्थानीयकरण, वैश्विक उत्पाद संरेखण, अपने वाहनों के पोर्टफोलियो के विस्तार और वास्तविक मूल्य देने वाले कार्यक्रमों के जरिए अपनी उत्पाद रणनीति को कैसे पैना करेंगे और ग्राहक अनुभव को मजबूत करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “हम अपने मौजूदा ग्राहकों की देखभाल पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें जीप से जिस सहयोग, सेवा और विश्वास की अपेक्षा है, वह मिले। भारत में सफलता के लिए लचीलापन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की जरूरत होती है, और हम इसी स्पष्टता के साथ निवेश कर रहे हैं ताकि जीप गर्व और वांछनीयता का ब्रांड बना रहे।”
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नए टचपॉइंट्स और विस्तार की योजना
फिलहाल जीप की भारत में लगभग 70 शहरों में मौजूदगी है और 85 से अधिक सेल्स व सर्विस टचपॉइंट्स हैं। इस नेटवर्क को भविष्य में धीरे-धीरे और विस्तारित किया जाएगा ताकि देश के और लोगों तक आसानी से पहुंचा जा सके।
कुल मिलाकर, जीप 2.0 की यह रणनीति कंपनी की लंबे समय तक भारत में टिके रहने और ग्राहकों के बीच विश्वास बनाने की प्रतिबद्धता दिखाती है। तात्कालिक बिक्री बढ़ाने की जगह, यह योजना मूल्य बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। अब देखना यह है कि 2027 तक का यह रोडमैप जीप को भारतीय ऑटो बाजार में किस नई पहचान तक ले जाता है।

